Saturday, December 22, 2012

रात में जागने की बारी है

दर्द में डूब रही है आज रात मेरी ...............दर्द से ऊब रही है आज रात मेरी  .............ऐसे दर्द का लम्हा गुजरा उसके तन मन से ........................भारत के मैले आंचल में आज रात है मेरी ....................ये कैसी रात है जो ढोल पीट सो जाते सभी .............वो रोती बिलखती सोचती मौत क्या होगी कभी ................कौन कहता है ये देश है भाई बहन का आलोक ...................हर रात किसी की इज्जत तार तार हुई अभी ............................केवल यह मत कहिये की रेप करने वालो को सजा दो बल्कि देश के संविधान के निति निदेशक तत्व की ५१अ के अंतरगत  महिला की अस्मिता और गरिमा के लिए कानून बनाना चाहिए | ना जाने क्यों सैकड़ो कानून बना कर देश महिलाओ को भ्रमित कर रहा है .....................सोचिये और कहिये ना शुभ रात्रि

3 comments:

  1. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 26/12/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  2. कड़े क़ानून जरूर बनने चाहियें ...

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  3. सभी के जेहन में बहुत प्रश्न हैं पर उन का कोई जवाब नहीं मिल रहा ..

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