Sunday, April 24, 2016

कविता में झाकता नंगा सच

पैसा !!!!!!!!!!!!!!!!!
मुझे न पता था कि,
एक दिन इतना ,
अकेला रह जाऊंगा ,
बात करूँगा पर ,
सामने सिर्फ सन्नाटी,
दीवार ही पाउँगा
लोग मेरी गरीबी ,
का मजाक उड़ाते ,
मिल जायेंगे ,
पैसा का हक़ दिखा कर ,
हर पल मेरी हैसियत
बता जायेंगे  पर  ,
किसी को क्या पता
मिटटी के महादेव
की कहानी ,
राम को समुन्द्र
उसी के सहारे
पार करा जाऊंगा ,
सोने की लंका में ,
बैठी सीता न सही ,
रावन का अहंकार ,
मिटा ही जाऊंगा ,
मंजूर है अर्जुन ,
और राम का वो
चौदह साल का वनवास ,
हस्तिनापुर भी मेरा होगा
और लंका का अहम्
अब जला ही जाऊंगा ............डॉ आलोक चान्टिया, अखिल भारतीय अधिकार संगठन

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